
Noida Journalist Pramod Dixit NOIDA किसानों की कई मांगों को लेकर नोएडा प्राधिकरण और ग्राम विकास संगठन के बीच 24 जून को प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। अब यह बैठक जुलाई में आयोजित की जाएगी। बैठक की नई तारीख नोएडा प्राधिकरण अलग से बताएगा। ग्राम विकास संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने बताया कि संगठन के संयोजक डीपी चौहान द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मुद्दों का हल निकालने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 24 जून 2026 की तारीख तय की थी। लेकिन उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय और सामाजिक सद्भाव समिति की बैठक और 27 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गौतमबुद्ध नगर में प्रस्तावित कार्यक्रम की तैयारियों के कारण अधिकारी बैठक नहीं कर पाए। अशोक चौहान ने कहा कि इससे पहले 29 मई 2026 को नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल, विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर, महाप्रबंधक नियोजन अरविंद कुमार, महाप्रबंधक अशोक कुमार अरोड़ा और महाप्रबंधक एसपी सिंह सहित अन्य अधिकारियों के साथ एक विस्तार से बैठक हुई थी। इस बैठक में किसानों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी। पहला मुद्दा अर्जित भूमि के संबंध में करार नियमावली-1997 के तहत किसानों को 10 प्रतिशत आबादी भूखंड उपलब्ध कराने का था। दूसरा मुद्दा आबादी क्षेत्रों को “जहां है, जैसी है” के आधार पर भूमि अधिग्रहण अधिनियम-1894 की धारा 48 के तहत डिनोटिफाई करने का था। तीसरा विषय नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र के गांवों को मॉडल ग्राम के रूप में विकसित करने से जुड़ा था। ग्राम विकास संगठन के अनुसार बैठक के बाद नोएडा प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी क्रांति शेखर द्वारा कार्यवृत्त भी जारी किया गया था और 24 जून को फिर से बैठक करने पर सहमति बनी थी। संगठन का कहना है कि तय तारीख पर बैठक न होने से किसानों में निराशा है। अशोक चौहान ने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण किसानों के मामलों में गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उनका कहना है कि किसानों के पक्ष में पर्याप्त दस्तावेज और रिकॉर्ड होने के बावजूद उनके अधिकारों से जुड़े मामलों का हल नहीं निकाला गया है। उन्होंने कहा कि अगर संगठन द्वारा दिए गए मुद्दों पर किसानों के हित में जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो ग्राम विकास संगठन नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ आंदोलन की योजना बनाएगा। संगठन ने उम्मीद जताई है कि जुलाई में प्रस्तावित बैठक में किसानों की लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लिए जाएंगे। इससे लंबे समय से चल रहे विवादों का हल निकल सकेगा।
