
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित. नोएडा, गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश)। सेक्टर-132 ग्राम रोहिल्लापुर के किसानों ने नोएडा प्राधिकरण द्वारा खसरा संख्या-4 की पुरानी ग्रामीण आबादी की भूमि पर 5% आवासीय भूखंड आवंटन की प्रस्तावित प्रक्रिया का विरोध किया है। किसानों का दावा है कि यह कार्रवाई उनके साथ हुए लिखित समझौते, आबादी विनियमीकरण की प्रक्रिया और न्यायालयों में लंबित मामलों के विपरीत है।किसानों का कहना है कि संबंधित भूमि का मुआवजा अब तक प्राप्त नहीं हुआ है और इस भूमि से जुड़े मामले जिला न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं। उनका आरोप है कि मुआवजा दिए बिना प्राधिकरण स्वयं को भूमि का वैधानिक स्वामी नहीं मान सकता।प्रेस वार्ता में किसानों ने बताया कि वर्ष 2016 में 24 मीटर सड़क निर्माण के लिए प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुरोध पर ग्रामीणों ने सहयोग किया था। उस समय आश्वासन दिया गया था कि प्रभावित भूमि का नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा और शेष पुरानी आबादी का आबादी विनियमावली के तहत विनियमीकरण किया जाएगा। किसानों के अनुसार, बाद में सर्वे और 5(1) समिति की रिपोर्ट में भी आबादी को मान्यता देते हुए विनियमीकरण की संस्तुति की गई थी।किसानों ने यह भी दावा किया कि यह भूमि पूर्व निर्धारित ग्राम परिधि के भीतर स्थित पुरानी आबादी है, इसलिए यहां 5% भूखंड योजना लागू करना नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि पूरी प्रक्रिया किसानों के वैधानिक अधिकारों की अनदेखी करते हुए की जा रही है।किसानों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित अभिलेखों, नोटशीट, ले-आउट और अनुमोदन प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। साथ ही यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 5% भूखंड आवंटन की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए।(नोट: यह खबर ग्राम रोहिल्लापुर के किसानों द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। मामले में नोएडा प्राधिकरण का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
