NOIDA JOURNALIST PRAMOD DIXIT

NOIDA SECTOR -62
IMS NOIDA में आयोजित ‘बियॉन्ड क्लासरूम’ श्रृंखला के अंतर्गत भविष्य की शिक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, वर्चुअल एवं ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी आधुनिक तकनीकों के बढ़ते प्रभाव और शिक्षा व्यवस्था में उनके महत्व पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम में आर्य कमल पब्लिक स्कूल की प्राचार्या प्रीति त्यागी, आईएमएस स्कूल ऑफ आईटी की डिप्टी एचओडी डॉ. अनीता पति तथा प्राध्यापिका शैली निगम ने शिक्षा के बदलते स्वरूप और तकनीक की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।प्रीति त्यागी ने कहा कि वर्तमान समय में अभिभावकों और विद्यार्थियों की अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। अब केवल अच्छे शैक्षणिक परिणाम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सुरक्षित, तकनीक-सक्षम और भविष्य उन्मुख शिक्षण वातावरण की मांग बढ़ी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की सीखने की प्रक्रिया में तकनीक को प्रभावी ढंग से शामिल करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ शिक्षा के मानवीय मूल्यों को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।डॉ. अनीता पति ने कहा कि किसी भी तकनीक का उद्देश्य शैक्षणिक लक्ष्यों को मजबूत करना होना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संस्थानों को तकनीकी निवेश से पहले उसके शैक्षणिक प्रभाव, शिक्षकों की तैयारी, दीर्घकालिक उपयोगिता और स्थायित्व का गंभीर मूल्यांकन करना चाहिए। उनका मानना है कि तकनीक का चयन समस्या के समाधान के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल उसके आधुनिक होने के कारण।शैली निगम ने कहा कि डिजिटल तकनीक शैक्षणिक संस्थानों और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद और पारदर्शिता स्थापित करने में सहायक है। उन्होंने बताया कि डिजिटल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन काउंसलिंग, वर्चुअल कैंपस टूर और रियल-टाइम अपडेट जैसी सुविधाएं अभिभावकों को समय पर सटीक जानकारी उपलब्ध कराती हैं, जिससे संस्थानों के प्रति विश्वास मजबूत होता है।कार्यक्रम की संयोजक ईशा व्यास ने बताया कि इस चर्चा का उद्देश्य शिक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों, कौशल आधारित शिक्षा की आवश्यकता और भविष्य की शिक्षण पद्धतियों पर सार्थक संवाद स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों और शिक्षकों को आने वाली चुनौतियों और अवसरों को समझने का बेहतर मंच प्रदान करते हैं।कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों ने माना कि उभरती तकनीकों के प्रभावी उपयोग से शिक्षा अधिक व्यावहारिक, इंटरैक्टिव और भविष्य उन्मुख बन सकती है। साथ ही यह भी आवश्यक है कि तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए छात्रों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए।
