NOIDA JENERALIST PRAMOD DIXIT DELHI NCR हाई ब्लड प्रेश, हाइपरटेंशन अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही

NOIDA युवाओं के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार DELHI NCR में पिछले कुछ वर्षों से 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में हाई बीपी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अस्पतालों और क्लीनिक्स की OPD में बड़ी संख्या में युवा मरीज हाई ब्लड प्रेशर, तनाव और हृदय संबंधी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं।यथार्थ हॉस्पिटल के HOD एवं सीनियर कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ. पंकज रंजन ने बताया कि कार्डियोलॉजी और मेडिसिन OPD में आने वाले हर 10 मरीजों में से 3 से 4 मरीज हाई ब्लड प्रेशर या अनकंट्रोल्ड BP से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि बीते 5 से 7 वर्षों में युवाओं में हाइपरटेंशन के मामलों में 35 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।उन्होंने जानकारी दी कि छोटे क्लीनिक्स में प्रतिदिन 15 से 25 मरीज जबकि बड़े अस्पतालों की OPD में रोजाना 50 से 150 मरीज हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। पहले यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अधिक देखी जाती थी, लेकिन अब 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवा प्रोफेशनल्स भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ता तनाव, लंबे ऑफिस आवर्स, ट्रैफिक की समस्या, खराब खानपान, जंक फूड, पर्याप्त नींद की कमी, धूम्रपान, वेपिंग और बढ़ता वायु प्रदूषण युवाओं के दिल की सेहत पर गंभीर असर डाल रहे हैं। इसके साथ ही मोटापा, डायबिटीज, फैटी लिवर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी हाई बीपी के खतरे को बढ़ा रही हैं।डॉ. पंकज रंजन ने बताया कि पुरुषों में 45 वर्ष से पहले धूम्रपान, शराब सेवन, तनाव और मोटापे के कारण हाई बीपी का खतरा अधिक देखा जा रहा है, जबकि महिलाओं में 35 से 40 वर्ष की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव, तनाव और डायबिटीज के कारण हाइपरटेंशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित ब्लड प्रेशर जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही नमक का सेवन कम करना, जंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना, रोजाना 30 से 45 मिनट तक व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते जीवनशैली में सुधार और नियमित हेल्थ मॉनिटरिंग अपनाकर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
