
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा, 29 सितंबर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नोएडा के चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में पहली बार सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया, जिसके बाद क्रोनिक हार्ट फेलियर से जूझ रहे 56 वर्षीय तपस कुमार को नया जीवन मिला। पंचकूला से उपलब्ध कराए गए डोनर हार्ट को नोएडा तक पहुंचाने के लिए विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया और करीब 20 किलोमीटर की दूरी महज 16 मिनट में तय कर डोनर हार्ट को अस्पताल पहुंचाया गया।गंभीर स्थिति में थे मरीजअस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार तपस कुमार पिछले कई वर्षों से क्रोनिक हार्ट फेलियर से पीड़ित थे। उनकी स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई थी और उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ रहा था। उन्हें सांस फूलने की गंभीर समस्या भी थी। चिकित्सकों के अनुसार तत्काल हृदय प्रत्यारोपण नहीं होने की स्थिति में उनके बचने की संभावना बेहद कम थी।मरीज को हृदय प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में रखा गया था। इस दौरान उनकी स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए चिकित्सकों ने उन्हें दवाओं पर रखा। हालांकि, डोनर हार्ट उपलब्ध होने तक उनकी स्थिति को स्थिर बनाए रखना बड़ी चुनौती थी।पंचकूला से नोएडा तक बनाया गया ग्रीन कॉरिडोरइस पूरे अभियान में समय सबसे महत्वपूर्ण था। पंचकूला में डोनर हार्ट उपलब्ध होने के बाद उसे नोएडा पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। हृदय प्रत्यारोपण में अंग को निर्धारित समयसीमा के भीतर प्राप्तकर्ता तक पहुंचाना आवश्यक होता है।इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, चिकित्सकों, ट्रांसप्लांट टीम, NOTTO तथा एयरपोर्ट अधिकारियों के बीच समन्वय किया गया। डोनर हार्ट को पंचकूला से गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट तक हवाई मार्ग से लाया गया। इसके बाद गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर इसे फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा पहुंचाया गया।अस्पताल के मुताबिक पंचकूला से नोएडा तक डोनर हार्ट पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर तत्काल समन्वय किया गया। इस दौरान जिला प्रशासन का सहयोग भी लिया गया।एक घंटे में पूरी हुई सर्जरीडोनर हार्ट के फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा पहुंचते ही सर्जिकल टीम पूरी तरह तैयार थी। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सकों ने डोनर हार्ट को सावधानीपूर्वक निकाला और मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित किया। प्रत्यारोपित हृदय को मरीज की प्रमुख हृदय धमनियों से जोड़ा गया। इसके बाद रक्त प्रवाह और हृदय की धड़कन शुरू होने तक मरीज की लगातार निगरानी की गई।अस्पताल के अनुसार सर्जिकल टीम की दक्षता के चलते ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया लगभग एक घंटे में पूरी कर ली गई। प्रत्यारोपण के बाद मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई तथा विशेषज्ञों की टीम ने पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल शुरू की।चिकित्सकों ने बताया बड़ी उपलब्धिफोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के चेयरमैन-कार्डियक साइंसेज डॉ. अजय कौल ने कहा कि तपस कुमार का हृदय बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका था और ऐसी स्थिति में किसी दवा या प्रक्रिया का अपेक्षित असर संभव नहीं था। उनके अनुसार डोनर हार्ट उपलब्ध होते ही उसे पंचकूला से नोएडा लाकर प्रत्यारोपित करना चुनौतीपूर्ण कार्य था।उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सर्जिकल सफलता नहीं है, बल्कि इससे नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों के लिए हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सामने आया है।डोनर परिवार के योगदान को किया यादइस पूरे मामले में डोनर परिवार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। अस्पताल की ओर से कहा गया कि अंगदान का निर्णय लेने वाले परिवार ने कठिन परिस्थिति में परोपकार और मानवता का परिचय दिया। डोनर के हृदय से दूसरे व्यक्ति को जीवन का अवसर मिला।फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के रीजनल डायरेक्टर मोहित सिंह ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नोएडा में पहली सफल हृदय प्रत्यारोपण उपलब्धि अस्पताल और क्षेत्र के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की सफलता में डॉक्टरों और क्लिनिकल केयर स्टाफ के साथ ट्रैफिक पुलिस, एयरपोर्ट अधिकारियों तथा अन्य संबंधित टीमों के समन्वय की अहम भूमिका रही।मरीज ने डोनर परिवार के प्रति जताया आभारहृदय प्रत्यारोपण के बाद तपस कुमार ने कहा कि उन्हें नया जीवन मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने डोनर परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके परोपकार ने उन्हें एक बार फिर जीवन आगे बढ़ाने का अवसर दिया। उन्होंने चिकित्सकों और पूरी टीम के प्रयासों के लिए भी आभार जताया।फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा के अनुसार यह सफलता क्षेत्र में उन्नत कार्डियक ट्रांसप्लांट सेवाओं की क्षमता को दर्शाती है। साथ ही, ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से समयबद्ध अंग परिवहन में विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी तालमेल की भूमिका भी सामने आई है।
