
NOIDA JURNALIST PRAMOD DIXIT NOIDA शिक्षा क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रही फिज़िक्सवाला के छात्र संचीत पटेल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की है। संचीत का चयन आगामी इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड (IJSO) के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता बुल्गारिया की राजधानी सोफिया में आयोजित की जाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर केवल 6 छात्रों को इस टीम में जगह मिलती है और संचीत ने अपनी मेहनत व प्रतिभा के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। संचीत पटेल की इस उपलब्धि को शिक्षा जगत में बड़ी सफलता माना जा रहा है। उन्होंने कठिन चयन प्रक्रिया को पार करते हुए देश के चुनिंदा प्रतिभाशाली छात्रों में अपनी जगह बनाई है। उनकी सफलता से न केवल परिवार और शिक्षकों में खुशी का माहौल है, बल्कि यह देशभर के छात्रों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। फिज़िक्सवाला के संस्थापक एवं सीईओ अलख पांडे ने संचीत की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और मजबूत इरादों के साथ कोई भी छात्र बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि IJSO जैसे प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचने के लिए जिस स्तर की मेहनत और समर्पण की जरूरत होती है, संचीत ने उसे पूरी लगन से साबित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संचीत वैश्विक मंच पर भारत का शानदार प्रतिनिधित्व करेंगे। संचीत पटेल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, स्कूल और शिक्षकों को दिया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रतियोगिता में हिस्सा लेना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद प्रेरणादायक अनुभव भी रहा। फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे विषयों को एक साथ संतुलित करना आसान नहीं था, लेकिन लगातार अभ्यास और एकाग्रता ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता का निरंतर समर्थन हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। संचीत ने अपने स्कूल और फिज़िक्सवाला के शिक्षकों का भी विशेष आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि शिक्षकों ने कठिन कॉन्सेप्ट्स को बेहद सरल तरीके से समझाया, जिससे उनमें आत्मविश्वास और गहरी समझ विकसित हुई। इसी मार्गदर्शन की वजह से वे इस स्तर तक पहुंच सके। बिहार के बेतिया स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में कक्षा 10 के छात्र संचीत पटेल का सफर लगातार मेहनत, अभ्यास और सीखने की प्रक्रिया से भरा रहा। उन्होंने शुरुआती फाउंडेशन बैचों से अपनी तैयारी शुरू की और धीरे-धीरे एडवांस्ड कॉन्सेप्ट क्लासेस, क्वालिफायर बैचों और इंटेंसिव ट्रेनिंग कैंप्स तक पहुंचे। हर चरण में बेहतर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने चयन की सभी कठिन प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पार किया। संचीत के पिता सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिक हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा उन्हें पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया। संचीत की उपलब्धि पर उनके गांव और स्कूल में भी खुशी का माहौल है। जूनियर साइंस ओलंपियाड की चयन प्रक्रिया देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं में मानी जाती है। इसकी शुरुआत नेशनल स्टैंडर्ड एग्जामिनेशन इन जूनियर साइंस से होती है, जिसमें देशभर से हजारों छात्र हिस्सा लेते हैं। इसके बाद चुनिंदा छात्रों को इंडियन नेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड के लिए चुना जाता है। फिर होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन द्वारा आयोजित ओरिएंटेशन-कम-सेलेक्शन कैंप में अंतिम चयन होता है, जहां से केवल 4 से 6 छात्रों की टीम भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुनी जाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संचीत पटेल की यह उपलब्धि देश के लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और सही दिशा में प्रयास करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। अब सभी की नजरें बुल्गारिया में होने वाले इंटरनेशनल जूनियर साइंस ओलंपियाड पर टिकी हैं, जहां संचीत भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए देश का नाम रोशन करने की तैयारी में जुटे हैं।
