
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित। ग्रेटर नोएडा (गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के मीडिया एवं जनसंपर्क विशेषज्ञ डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा ने विस्तृत प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी संवैधानिक पदाधिकारी के भविष्य का निर्णय जनभावनाओं के क्षणिक उभार या राजनीतिक दबाव से नहीं, बल्कि संविधान, तथ्यों और विधिसम्मत प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए।डॉ. शर्मा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधारों और नीतिगत पहलों को आगे बढ़ाया। उन्होंने माना कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) समेत कुछ मुद्दों पर मतभेद और आलोचनाएं सामने आईं, लेकिन लोकतंत्र में असहमति का समाधान संवैधानिक संस्थाओं और संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि जनदबाव के आधार पर।उन्होंने कहा कि यदि किसी मंत्री या संवैधानिक पदाधिकारी का भविष्य केवल सड़क पर बने माहौल से तय होने लगे, तो इससे शासन व्यवस्था की संस्थागत स्थिरता, प्रशासनिक स्वायत्तता और विधि के शासन पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। लोकतंत्र की मजबूती संविधान की सर्वोच्चता और संस्थाओं की गरिमा में निहित है।भाजपा नेता ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर राष्ट्रविरोधी, विघटनकारी अथवा अराजक तत्वों को राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता फैलाने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, नागरिकों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से राष्ट्रहित, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने की अपील की।डॉ. भगवत प्रसाद शर्मा ने कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे मजबूत लोकतंत्र है, जिसकी वास्तविक शक्ति संविधान, विधि के शासन, संस्थागत निष्पक्षता और राष्ट्रीय उत्तरदायित्व में है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सार्वजनिक निर्णय न्याय, तथ्य, संवैधानिक प्रक्रिया और राष्ट्रहित के आधार पर लिया जाना चाहिए।उन्होंने अपने वक्तव्य का समापन इस संदेश के साथ किया कि “राष्ट्र सर्वोपरि है, संविधान सर्वोच्च है और लोकतंत्र की गरिमा अक्षुण्ण रहनी चाहिए।”
