
Noida JENERALIST PRAMOD DIXIT
Noida निजी स्कूलों और अस्पतालों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और ग्रामीणों को मिलने वाली छूट संबंधी सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठे

ग्राम विकास संगठन NOIDA के प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को लेकर NOIDA प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करूणेश से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई।ग्राम विकास संगठन नोएडा के संयोजक डीपी चौहान के नेतृत्व में सेक्टर-6 स्थित प्रशासनिक कार्यालय में हुई इस बैठक में संगठन के पदाधिकारियों ने वर्ष 2015 में जारी निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि उस समय मुख्यमंत्री सचिवालय से आदेश जारी हुआ था कि नोएडा क्षेत्र के सभी निजी स्कूल और अस्पताल अपने गेट पर 10×15 के बोर्ड लगाकर यह स्पष्ट करें कि लीज डीड की शर्तों के अनुसार ग्रामीणों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को कौन-कौन सी सुविधाएं और छूट दी जा रही हैं।संगठन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने बताया कि जमीनी हकीकत यह है कि आज तक अधिकांश निजी स्कूलों और अस्पतालों ने इस निर्देश का पालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जब किसान और कमजोर वर्ग के लोग इलाज या शिक्षा के लिए इन संस्थानों में जाते हैं, तो उन्हें निर्धारित छूट नहीं मिलती, जिससे उनका शोषण हो रहा है।उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2015 में इस मुद्दे पर NOIDA प्राधिकरण द्वारा बैठक कर सभी संबंधित संस्थानों को निर्देशित किया गया था कि वे लीज डीड की शर्तों के अनुसार डिस्प्ले बोर्ड लगाएं। इसके बावजूद 2026 तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।प्रतिनिधिमंडल की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करूणेश ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारी शोभा कुशवाहा को फोन कर आदेशित किया कि सभी स्कूलों और अस्पतालों में लीज डीड की शर्तों के अनुसार छूट और सुविधाओं से संबंधित जानकारी वाले डिस्प्ले बोर्ड अनिवार्य रूप से लगवाए जाएं।बैठक में संगठन के संयोजक डीपी चौहान, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान और सतेन्द्र गुर्जर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। संगठन ने उम्मीद जताई है कि इस बार प्राधिकरण के निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा, जिससे गरीब और ग्रामीण वर्ग को उनका अधिकार मिल सके।यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नियमों के पालन में लापरवाही से आम जनता को किस तरह नुकसान उठाना पड़ता है। अब देखना होगा कि NOIDA प्राधिकरण के ताजा निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।

