नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा मेदांता हॉस्पिटल में वर्ल्ड लिवर डे से पहले एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टरों ने लोगों को लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सही जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। इस वर्ष की थीम “सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रांग लिवर” के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में प्रिवेंटिव केयर, समय पर बीमारी की पहचान और लाइफस्टाइल सुधार को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में गैस्ट्रोसाइंस और जीआई सर्जरी से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हिस्सा लिया और लिवर से जुड़ी बीमारियों की “ साइलेंट” प्रकृति के बारे में लोगों को जागरूक किया। विशेषज्ञों ने बताया कि लिवर की कई बीमारियां शुरुआती चरण में बिना लक्षण के बढ़ती रहती हैं, जिससे मरीज को देर से पता चलता है और इलाज जटिल हो जाता है। डॉक्टरों ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग में। इस स्थिति से बचने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और शराब के सेवन से दूरी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि लिवर कैंसर का खतरा उन लोगों में अधिक होता है, जिन्हें हेपेटाइटिस, फैटी लिवर या सिरोसिस जैसी पुरानी बीमारियां होती हैं। ऐसे में समय-समय पर स्क्रीनिंग और मेडिकल जांच बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो सके और बेहतर इलाज संभव हो। सत्र में यह भी बताया गया कि मोटापा, डायबिटीज, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता लिवर रोगों के प्रमुख कारण हैं। डॉक्टरों ने लोगों को फलों, सब्जियों और होल ग्रेन्स से भरपूर आहार लेने तथा प्रोसेस्ड और हाई-फैट फूड से दूरी बनाने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने जोर देते हुए कहा कि लिवर स्वास्थ्य के लिए प्रिवेंशन सबसे महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करना जरूरी है। साथ ही हेपेटाइटिस के खिलाफ वैक्सीनेशन और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें लोगों ने अपने सवाल पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। डॉक्टरों ने अंत में कहा कि सही आदतें अपनाकर लिवर से जुड़ी अधिकांश बीमारियों को रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। युवाओं में बढ़ते फैटी लिवर के मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।बदलती लाइफस्टाइल से बढ़ रहा लिवर रोग का खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित नोएडा। मेदांता हॉस्पिटल में वर्ल्ड लिवर डे से पहले एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें डॉक्टरों ने लोगों को लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सही जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। इस वर्ष की थीम “सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रांग लिवर” के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में प्रिवेंटिव केयर, समय पर बीमारी की पहचान और लाइफस्टाइल सुधार को लेकर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में गैस्ट्रोसाइंस और जीआई सर्जरी से जुड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों ने हिस्सा लिया और लिवर से जुड़ी बीमारियों की “साइलेंट” प्रकृति के बारे में लोगों को जागरूक किया। विशेषज्ञों ने बताया कि लिवर की कई बीमारियां शुरुआती चरण में बिना लक्षण के बढ़ती रहती हैं, जिससे मरीज को देर से पता चलता है और इलाज जटिल हो जाता है। डॉक्टरों ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग में। इस स्थिति से बचने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और शराब के सेवन से दूरी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि लिवर कैंसर का खतरा उन लोगों में अधिक होता है, जिन्हें हेपेटाइटिस, फैटी लिवर या सिरोसिस जैसी पुरानी बीमारियां होती हैं। ऐसे में समय-समय पर स्क्रीनिंग और मेडिकल जांच बेहद जरूरी है, ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो सके और बेहतर इलाज संभव हो। सत्र में यह भी बताया गया कि मोटापा, डायबिटीज, असंतुलित खानपान और शारीरिक निष्क्रियता लिवर रोगों के प्रमुख कारण हैं। डॉक्टरों ने लोगों को फलों, सब्जियों और होल ग्रेन्स से भरपूर आहार लेने तथा प्रोसेस्ड और हाई-फैट फूड से दूरी बनाने की सलाह दी। विशेषज्ञों ने जोर देते हुए कहा कि लिवर स्वास्थ्य के लिए प्रिवेंशन सबसे महत्वपूर्ण है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करना जरूरी है। साथ ही हेपेटाइटिस के खिलाफ वैक्सीनेशन और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान एक इंटरैक्टिव सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें लोगों ने अपने सवाल पूछे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। डॉक्टरों ने अंत में कहा कि सही आदतें अपनाकर लिवर से जुड़ी अधिकांश बीमारियों को रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। युवाओं में बढ़ते फैटी लिवर के मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।