NOIDA JOURNALIST PRAMOD DIXIT

NOIDA विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक रहने और तंबाकू मुक्त जीवन अपनाने का आह्वान किया। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू आज भी दुनिया भर में रोकी जा सकने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है और इसका प्रभाव केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। कैलाश अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन एवं स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि तंबाकू का सेवन शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है। विशेष रूप से फेफड़ों, हृदय और रक्त वाहिकाओं पर इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि धूम्रपान और अन्य तंबाकू उत्पादों के लगातार सेवन से फेफड़ों के कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), अस्थमा की गंभीर जटिलताओं, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली के बीच तंबाकू उत्पादों के स्वरूप भी बदल रहे हैं। पारंपरिक सिगरेट के अलावा ई-सिगरेट, वेपिंग डिवाइस और अन्य निकोटीन आधारित उत्पाद युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई लोग इन्हें सामान्य सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक या सुरक्षित विकल्प मान लेते हैं, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ये उत्पाद भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं और निकोटीन की लत को और अधिक मजबूत बना सकते हैं। डॉ. गुप्ता के अनुसार तंबाकू छोड़ने का फैसला जीवन के किसी भी चरण में लिया जाए, उसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगते हैं। धूम्रपान छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद शरीर की कार्यप्रणाली में सुधार महसूस होने लगता है। समय के साथ फेफड़ों की क्षमता बेहतर होती है और हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी उम्र में तंबाकू छोड़ने को लाभकारी मानते हैं। उन्होंने कहा कि तंबाकू छोड़ना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि निकोटीन की लत शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर व्यक्ति को प्रभावित करती है। ऐसे में केवल इच्छाशक्ति ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और सहयोग की भी आवश्यकता होती है। तंबाकू सेवन की आदत को बढ़ावा देने वाले कारणों और परिस्थितियों की पहचान करना इस प्रक्रिया का पहला कदम है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि तंबाकू की इच्छा होने पर व्यक्ति को स्वस्थ विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए। नियमित व्यायाम, योग, ध्यान, संतुलित आहार और सकारात्मक दिनचर्या अपनाने से तंबाकू छोड़ने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श और निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (एनआरटी) का उपयोग भी लाभकारी साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू छोड़ने का कोई एक निश्चित तरीका सभी लोगों पर समान रूप से प्रभावी नहीं होता। प्रत्येक व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए व्यवहार में सकारात्मक बदलाव, परिवार और मित्रों का सहयोग तथा लगातार प्रयास सफलता की संभावना को बढ़ाते हैं। तंबाकू छोड़ने की प्रक्रिया में धैर्य और निरंतरता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना ही नहीं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू मुक्त जीवन व्यक्ति को न केवल गंभीर बीमारियों से बचाता है, बल्कि उसे अधिक सक्रिय, ऊर्जावान और बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन जीने का अवसर भी प्रदान करता है। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग को तंबाकू के दुष्प्रभावों को समझते हुए इससे दूरी बनाने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
