Noida journalist Pramod Dixit

देश की सर्वोच्च अदालत ने महर्षि महेश योगी संस्थान की संपत्तियों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने संस्थान की जमीनों के अनधिकृत हस्तांतरण और फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुई बिक्री की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से विवादों में चल रहे इस मामले में नया मोड़ आ गया है।यह आदेश महर्षि संस्थान से जुड़े श्रीकांत ओझा द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संस्थान की संपत्तियों के संबंध में सामने आ रहे आरोप बेहद गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष एवं व्यापक जांच आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए स्वतंत्र और प्रभावी जांच जरूरी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संस्थान की संपत्तियों का हस्तांतरण किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किस स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि गठित की जाने वाली SIT में रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज को भी शामिल किया जाए। अदालत ने माना कि सोसाइटी से जुड़ी संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच में रजिस्ट्रार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि जमीनों के वास्तविक हस्तांतरण, दस्तावेजों की वैधता और उससे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जाए।सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(3) के तहत जांच रिपोर्ट दाखिल करने से रोका गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच प्रक्रिया पर इस प्रकार की रोक न्यायहित में उचित नहीं है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी मामले में गंभीर आपराधिक आरोप सामने आते हैं तो जांच एजेंसियों को अपना कार्य स्वतंत्र रूप से करने दिया जाना चाहिए।अदालत ने जांच अधिकारी को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आरोपी पक्ष को भी जांच में पूरा सहयोग करने के लिए कहा गया है। सुप्रीम Court ने यह भी टिप्पणी की कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संस्थान की जमीनों से जुड़े कई आपराधिक मामले पहले से लंबित हैं, इसके बावजूद संपत्तियों की खरीद-फरोख्त जारी रहने की बात बेहद चिंताजनक है।कोर्ट ने SIT को तीन महीने के भीतर अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि जांच के दौरान धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा या आपराधिक मंशा के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि महर्षि महेश योगी ने अपने संस्थान की स्थापना आध्यात्मिक उत्थान और सामाजिक उद्देश्य के लिए की थी और संभवतः उन्होंने कभी नहीं चाहा होगा कि संस्थान की संपत्तियां इस प्रकार विवादों और अवैध कब्जों का विषय बनें।सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को संस्थान की संपत्तियों से जुड़े विवादों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि SIT जांच के बाद कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं और वर्षों से चल रहे जमीन विवादों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं इस फैसले के बाद संबंधित पक्षों में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजर SIT की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
