NOIDA JOURNALIST PRAMOD DIXIT
Noida के सेक्टर-70 स्थित फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन द्वारा मातृ दिवस के अवसर पर ‘क्षितिज की गूंज –

एक सम्मान माँ के नाम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम उन माताओं को समर्पित रहा, जिनका प्रेम, त्याग और संघर्ष विशेष बच्चों की थेरेपी यात्रा में सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है। आयोजन के दौरान भावनात्मक, प्रेरणादायक और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला।कार्यक्रम में विशेष बच्चों की माताओं को उनके समर्पण और संघर्ष के लिए ताज पहनाकर एवं सम्मान-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान माताओं ने आत्मविश्वास और गरिमा के साथ रैंप वॉक कर महिला सशक्तिकरण का प्रेरणादायक संदेश दिया। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।दिव्यांग बच्चों द्वारा अपनी माताओं को समर्पित मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने सभी का दिल जीत लिया। बच्चों और माताओं के बीच भावनात्मक जुड़ाव कार्यक्रम में साफ दिखाई दिया। वहीं आर्ट-क्राफ्ट गतिविधियों और विभिन्न मनोरंजक खेलों ने मां-बच्चों के रिश्ते को और अधिक मजबूत बनाने का कार्य किया।कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा अपनी माताओं के लिए स्वनिर्मित उपहार भी तैयार किए गए। बच्चों के हाथों से बने उपहार प्राप्त कर कई माताएं भावुक हो उठीं। आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि विशेष बच्चों के विकास में माताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. निधि बंसल, संस्थापक रानसरी रहीं। इस अवसर पर फाउंडेशन के बच्चों द्वारा उन्हें स्वनिर्मित हैंड सैनिटाइज़र एवं इन-हाउस न्यूज़लेटर भेंट कर सम्मानित किया गया। विशिष्ट अतिथि के रूप में कृष्णा शर्मा, अविनाश सेठी, काकुली चटर्जी एवं वंदना सोनी, अध्यक्ष वंदे भारत राष्ट्रवादी संगठन उपस्थित रहीं। सभी अतिथियों ने माताओं के योगदान और बच्चों की प्रतिभा की सराहना की।आयोजन को सफल बनाने में विशेष शिक्षिका एलिका रावत, एडमिन हेड कृष्णा यादव और फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन के निदेशक डॉ. महीपाल सिंह एवं डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी, डिजिटल मीडिया मैनेजर सौम्या सोनी और सेंटर मैनेजर सुरभि जैन ने कहा कि ऐसे आयोजन विशेष बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि मातृ शक्ति का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को हर दिन माताओं के योगदान को स्वीकार करते हुए उनके सम्मान और सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने माताओं के सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं और आयोजन को प्रेरणादायक बताया।
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