NOIDA JOURNALIST PRAMOD DIXIT Ghaziabad में कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान द्वारा ‘संवाद और विकास के लिए विश्व सांस्कृतिक विविधता दिवस’ के अवसर पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक संध्या में भारतीय कला, संस्कृति और शिक्षा का अद्भुत संगम देखने को मिला। जयपुरिया स्कूल ऑफ बिजनेस में आयोजित इस कार्यक्रम में देश की सांस्कृतिक विरासत, कलाकारों के भविष्य और
युवाओं की भूमिका को लेकर गंभीर चर्चा

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर लेफ्टिनेंट कर्नल अरविंद महाजन, डॉ. के.जी. सुरेश, डॉ. तपन कुमार नायक, डॉ. रमेश चंद्र गौर, प्रसिद्ध संगीतकार Ustad Kamal Sabri और केरल लोकसाहित्य अकादमी के पी.वी. लवलीन सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान कला कल्प सांस्कृतिक संस्थान की संस्थापक निदेशक डॉ. अतसी मिश्रा ने कलाकारों के डिजिटल भविष्य और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक अब कलाकारों के लिए केवल सुविधा नहीं बल्कि आर्थिक मजबूती का प्रमुख माध्यम बन चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि कलाकारों को आर्थिक रूप से सशक्त नहीं किया गया तो प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को लंबे समय तक जीवित रखना कठिन होगा। कला कल्प के उपाध्यक्ष और आरएसएस स्वयंसेवक मोहित माधव ने “कल्चर मैटर्स” विषय पर बोलते हुए कहा कि किसी भी देश की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से होती है। उन्होंने परिवार और समाज को युवाओं में संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में आयोजित परिचर्चा के दौरान कला और संस्कृति के संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। डॉ. के.जी. सुरेश ने सांस्कृतिक स्वतंत्रता और कलाकारों की बहुमुखी प्रतिभा पर जोर देते हुए कहा कि कला के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग और नई सामग्री जरूरी है। वहीं उस्ताद कमाल साबरी ने कलाकारों के लिए नियमित रियाज़ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कला के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताई। केरल लोकसाहित्य अकादमी के पी.वी. लवलीन ने राज्य सरकार द्वारा जनजातीय और लोक परंपराओं के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। वहीं डॉ. रमेश चंद्र गौर और डॉ. तपन नायक ने कला और संस्कृति के शैक्षणिक अध्ययन को मजबूत बनाने पर अपने विचार साझा किए। इस सांस्कृतिक शाम का सबसे अहम क्षण तब आया जब ‘कला कल्प रिसर्च काउंसिल’ की आधिकारिक शुरुआत की गई। संस्थान ने प्रदर्शन कला के क्षेत्र में संरचित शोध और अकादमिक अध्ययन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस परिषद के गठन की घोषणा की। साथ ही कला कल्प द्वारा प्रदर्शन कला शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट दस्तावेजीकरण और उच्च गुणवत्ता मानकों के लिए आईएसओ प्रमाणन प्राप्त करने की जानकारी भी साझा की गई। कार्यक्रम के समापन पर शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों ने सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्यांगना दीपशिखा ने ओडिसी और आयुषी ने कत्थक की आकर्षक प्रस्तुति देकर पूरे सभागार में भारतीय संस्कृति की छटा बिखेर दी। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय विरासत के संरक्षण, कलाकारों के सशक्तिकरण और युवा पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में भी सामने आया।
