
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा के सेक्टर-62 स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में आयुर्वेद एवं आयुष क्षेत्र से जुड़ी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर की प्रमुख आयुर्वेदिक कंपनियों ने हिस्सा लिया। डाबर, बैद्यनाथ, झंडू, उंझा, गुरुकुल महर्षि सहित कई कंपनियों ने अपने-अपने स्टॉल लगाकर आयुर्वेदिक उत्पादों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाई।प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद और स्वदेशी चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना तथा आयुर्वेदिक उत्पादों के प्रति लोगों का रुझान बढ़ाना रहा। बड़ी संख्या में कंपनियों की मौजूदगी ने आयुर्वेद के बढ़ते बाजार और इसके प्रति लोगों की रुचि को भी सामने रखा।आयुर्वेद की शुद्धता और मिलावट पर सवालहालांकि, आयुर्वेद के बढ़ते प्रभाव के बीच दवाओं और उत्पादों की गुणवत्ता एवं शुद्धता को लेकर समय-समय पर उठने वाले सवाल भी महत्वपूर्ण हैं। आम जनता के बीच यह चिंता रहती है कि उन्हें मिलने वाली आयुर्वेदिक दवाएं निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप और सुरक्षित हों।इसी मुद्दे को लेकर समय संदेश टाइम्स और T News की टीम ने प्रदर्शनी स्थल पर पहुंचकर आयुर्वेद क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से बातचीत की।इस दौरान AIMIL Pharmaceuticals के डायरेक्टर सचित शर्मा से संवाददाता प्रमोद दीक्षित ने आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता, शुद्धता और मिलावट की आशंकाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल किए।कंपनियों के साथ निगरानी व्यवस्था की भी जिम्मेदारीबातचीत में यह सवाल प्रमुखता से सामने आया कि आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में केवल दवा कंपनियों की ही नहीं, बल्कि संबंधित नियामक संस्थाओं और निगरानी व्यवस्था की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।सरकार की ओर से संबंधित विभागों को आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में यदि किसी स्तर पर आयुर्वेदिक उत्पादों की गुणवत्ता या मिलावट को लेकर शिकायतें सामने आती हैं, तो उनकी प्रभावी जांच और समयबद्ध कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठते हैं।आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा है और देश के करोड़ों लोग आज भी इस पद्धति पर भरोसा करते हैं। ऐसे में इस भरोसे को बनाए रखने के लिए दवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावी निगरानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।समय संदेश टाइम्स और T News की पड़ताल में उठाए गए सवाल अब इस बात पर केंद्रित हैं कि आयुर्वेदिक दवाओं की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों, सरकार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी किस तरह तय होती है और आम जनता के भरोसे की सुरक्षा के लिए आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
