
नोएडा। सेक्टर-62 स्थित आईएमएस डिजाइन एंड इनोवेशन एकेडमी (आईएमएस-डीआईए) के विद्यार्थियों ने नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हुमायूं के मकबरे का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय इतिहास, संस्कृति और मुगलकालीन स्थापत्य कला को किताबों से बाहर निकलकर प्रत्यक्ष रूप से समझा।शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक अनुभव से जोड़ना था। ऐतिहासिक स्मारक के भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने इसकी वास्तुकला, निर्माण शैली, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक महत्व से जुड़ी विभिन्न जानकारियां हासिल कीं।विद्यार्थियों ने हुमायूं के मकबरे के परिसर का भ्रमण करते हुए इसकी भव्य स्थापत्य संरचना का बारीकी से अवलोकन किया। चारबाग शैली में विकसित परिसर, विशाल गुंबद, आकर्षक मेहराब और लाल बलुआ पत्थर तथा संगमरमर के कलात्मक प्रयोग ने विद्यार्थियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। डिजाइन के विद्यार्थियों के लिए यह भ्रमण रचनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उन्हें स्थापत्य संरचना, अनुपात, डिजाइन और ऐतिहासिक सौंदर्यबोध को करीब से देखने का अवसर मिला।आईएमएस के वाइस प्रेसिडेंट चिराग गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों का समग्र विकास केवल कक्षा में पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से विद्यार्थियों को परिचित कराना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को अतीत को समझने और उसे वर्तमान से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति बेहतर दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करते हैं।आईएमएस-डीआईए के डीन प्रोफेसर डॉ. एम.के.वी. नायर ने कहा कि डिजाइन के विद्यार्थियों के लिए प्रत्यक्ष अनुभव बेहद महत्वपूर्ण है। हुमायूं के मकबरे जैसे ऐतिहासिक स्थल विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास, कला और स्थापत्य की समृद्ध परंपरा को करीब से समझने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के अनुभव विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और सीखने की क्षमता को विकसित करने में सहायक होते हैं।भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने स्मारक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ उसकी स्थापत्य विशेषताओं को भी समझा। उन्होंने जाना कि किस तरह वास्तुकला में संरचना, सामग्री, डिजाइन और सौंदर्य का समन्वय किसी ऐतिहासिक स्मारक को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है।आईएमएस-डीआईए की ओर से आयोजित यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए इतिहास और डिजाइन को एक साथ समझने का उपयोगी अनुभव रहा। संस्थान का मानना है कि कक्षा के बाहर होने वाली ऐसी गतिविधियां विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के साथ उनकी रचनात्मक और विश्लेषणात्मक क्षमता को भी मजबूत करती हैं।
