
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित दिल्ली। ग्रेटर नोएडा-107 स्थित ग्रेट वैल्यू रियल्टी के प्रोजेक्ट एकानम को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) दिए जाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेट वैल्यू शरणम अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का पूर्व निर्णय प्रभावी बना हुआ है।सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के संबंधित निर्णय और आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है। इसके बाद SLP को खारिज कर दिया गया।इस मामले में ग्रेट वैल्यू रियल्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता महेश अग्रवाल, कार्तिकेय दुबे और कानूनी टीम के अन्य सदस्य मौजूद रहे।मामला ग्रेट वैल्यू एकानम को अतिरिक्त FAR प्रदान किए जाने की नोएडा प्राधिकरण की स्वीकृति को AOA द्वारा दी गई चुनौती से संबंधित था। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संबंधित याचिका को खारिज करते हुए नोएडा प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत अतिरिक्त FAR और राज्य सरकार के पुनरीक्षण आदेश को बरकरार रखा था।हाईकोर्ट के निर्णय में यह भी दर्ज किया गया था कि नोएडा प्राधिकरण ने सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की और 978 वैध सहमतियां पाई गईं। न्यायालय के अनुसार यह गृहस्वामियों की बहुमत सहमति को दर्शाता था। इसके अलावा प्राधिकरण द्वारा आवेदन और आपत्तियां आमंत्रित करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए जाने का भी उल्लेख निर्णय में किया गया था।वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप का आधार नहीं पाया और SLP खारिज कर दी। उनके अनुसार इससे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित चुनौती को अंतिमता मिली है।ग्रेट वैल्यू रियल्टी के निदेशक पायस अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सभी हितधारकों के लिए स्थिति स्पष्ट हुई है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब इस मामले से आगे बढ़कर जिम्मेदार विकास, पारदर्शी संवाद और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करेगी।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्रेट वैल्यू एकानम के अतिरिक्त FAR से जुड़े इस कानूनी विवाद में हाईकोर्ट का निर्णय प्रभावी बना हुआ है, जिससे मामले में आगे की कानूनी स्थिति को लेकर स्पष्टता आई है।
