
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा। हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों, तंबाकू के सेवन और बढ़ते तनाव के बीच कम उम्र के लोगों में भी हृदय संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं। इसी चुनौती और हृदय चिकित्सा के बदलते स्वरूप पर चर्चा के लिए मेदांता नोएडा में मेदांता कार्डियक कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया।कॉन्क्लेव में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे हृदय रोग विशेषज्ञों, कार्डियक सर्जनों और चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने आधुनिक उपचार पद्धतियों, नई तकनीकों और मरीजों के बेहतर प्रबंधन पर विचार साझा किए। कार्यक्रम का उद्घाटन मेदांता ग्रुप के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. नरेश त्रेहन ने किया।विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई हैं। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की कॉज ऑफ डेथ 2021-23 रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि देश में होने वाली कुल मौतों में करीब 31 प्रतिशत मौतें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से जुड़ी हैं। विशेषज्ञों ने खासतौर पर 30 और 40 वर्ष की उम्र के लोगों में बढ़ते मामलों को लेकर जीवनशैली में सावधानी बरतने की जरूरत बताई।कॉन्क्लेव में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, कार्डियक सर्जरी, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, क्लिनिकल एवं प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी तथा स्ट्रक्चरल हार्ट केयर जैसे क्षेत्रों पर चर्चा हुई। इलाज के दौरान मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार उपचार का विकल्प चुनने, कम चीरे वाली प्रक्रियाओं और मिनिमली इनवेसिव सर्जरी जैसे विकल्पों पर भी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि हृदय संबंधी आपात स्थिति में केवल अत्याधुनिक तकनीक ही पर्याप्त नहीं है। मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना, तत्काल उपचार शुरू करना और सही चिकित्सकीय निर्णय लेना भी उपचार के परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा कि हृदय चिकित्सा में लगातार बदलाव हो रहे हैं और नई जांच एवं उपचार तकनीकों ने कई जटिल परिस्थितियों के इलाज की संभावनाएं बढ़ाई हैं। उनके अनुसार चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्ध प्रगति का लाभ मरीजों तक समय पर पहुंचाना और विशेषज्ञों के अनुभव व ज्ञान को साझा करना जरूरी है।कार्यक्रम में डॉ. अमित कुमार मलिक, डॉ. निशांत त्यागी, डॉ. परनीश अरोड़ा, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. राजीव मेहरोत्रा, डॉ. संजय कुमार, डॉ. विनीत भाटिया, डॉ. रंजन मोदी, डॉ. रवि कुमार गुप्ता और डॉ. वसीम फारूकी सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।कॉन्क्लेव के माध्यम से चिकित्सा विशेषज्ञों ने हृदय रोगों की बदलती चुनौतियों के बीच उपचार के नए विकल्पों, चिकित्सकीय अनुभवों और आधुनिक तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर संवाद को आगे बढ़ाया।
