
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित नोएडा, गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश)। सेक्टर-122 कम्युनिटी हॉल में आयोजित फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन स्थापना दिवस समारोह में दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, समावेशी शिक्षा और कौशल विकास का संदेश प्रमुखता से सामने आया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने जरूरतमंद दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल, ट्राइसाइकिल और व्हीलचेयर वितरित करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।समारोह में प्रख्यात शिक्षाविद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, प्रेरक वक्ता सागर सिन्हा, फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. महिपाल सिंह, निदेशक एवं ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, सीईओ डॉ. सुष्मिता भाटी सहित चिकित्सक, शिक्षाविद, समाजसेवी, अभिभावक और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान करीब 40 सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिनमें 10 इलेक्ट्रिक ट्राइसाइकिल, 10 सामान्य ट्राइसाइकिल और 20 व्हीलचेयर शामिल थीं। इस अवसर पर बच्चों द्वारा तैयार की गई स्किल डेवलपमेंट प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में हस्तशिल्प, रेजिन आर्ट, मिट्टी से बने उत्पाद और अन्य नवाचारों के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता का प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में संगीत, नृत्य, कविता और नाटक ने भी दर्शकों की सराहना बटोरी।अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिव्यांगजनों के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में आरक्षण बढ़ाने जैसे निर्णयों ने दिव्यांगजनों को आगे बढ़ने के नए अवसर दिए हैं। उन्होंने फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था समाज सेवा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का कार्य कर रही है।पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को पहचानना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शारीरिक सीमाएं किसी व्यक्ति की क्षमता को सीमित नहीं करतीं और सही मार्गदर्शन मिलने पर दिव्यांगजन भी समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस दौरान उन्होंने फाउंडेशन की वार्षिक पत्रिका ‘होराइजन’ का विमोचन किया तथा बच्चों द्वारा विकसित सेंसरी इंटीग्रेशन उपकरणों और हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन कर उनकी सराहना की।प्रेरक वक्ता सागर सिन्हा ने आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि अवसर मिलने पर हर बच्चा अपनी अलग पहचान बना सकता है।फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि संस्था का उद्देश्य दिव्यांग बच्चों और युवाओं को केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि संस्था भविष्य में भी पुनर्वास और समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयासों का विस्तार करेगी।कार्यक्रम के दौरान फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विशेषज्ञों को ‘अवार्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। साथ ही ‘एक सम्मान मां के नाम’ पहल के अंतर्गत माताओं के समर्पण और योगदान का सम्मान किया गया तथा ‘सेरेब्रल पाल्सी’ विषय पर आधारित पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया।समारोह का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। फर्स्ट वन रिहैब फाउंडेशन ने दिव्यांगजनों के शिक्षा, पुनर्वास, कौशल विकास और समग्र सशक्तिकरण के लिए अपने प्रयासों को और व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
