Noida journalist Pramod Dixit NOIDA सेक्टर-159 स्थित ग्राम झटटा के श्री राधावल्लभ मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिवस

बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री श्री 1008 किशोरी शरण महाराज बाबा सूरदास की कृपा से आयोजित कथा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भावपूर्ण एवं संगीतमय वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कथा वाचक पं. राकेश शास्त्री ने महारास और रास पंच अध्याय का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि भागवत के पंच गीत, भागवत के पंच प्राण माने गए हैं। जो श्रद्धालु इन गीतों का सच्चे भाव से स्मरण और गायन करता है, उसे सहज ही वृंदावन की भक्ति प्राप्त हो जाती है और उसका जीवन सफल बन जाता है।कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने, कालयवन वध, उद्धव-गोपी संवाद, गोपियों को गुरु स्वरूप मानने, द्वारका स्थापना और रुक्मिणी विवाह जैसे प्रसंगों का संगीतमय पाठ किया गया। श्रद्धालु कथा के मधुर भजनों और प्रसंगों में डूबे नजर आए।आचार्य ने कहा कि महारास केवल लीला नहीं बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी की मधुर ध्वनि से गोपियों का आह्वान किया और महारास के माध्यम से आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का संदेश दिया।श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आयोजित भंडारे का आयोजन चौ. सुंदर भाटी, सुपुत्र स्व. चौ. बेगराज भाटी परिवार की ओर से किया गया। कथा समापन के बाद भगवान की आरती उतारी गई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।इस पावन धार्मिक आयोजन में रोहताश चौहान, बाबूराम चौहान, दयाराम एडवोकेट, जितेन्द्र चौहान एडवोकेट, राजपाल भाटी, शेर सिंह, ईश्वर भाटी, ओमवीर, सुभाष भाटी, फूलसिंह, हरिराम, चेतन शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
