
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा। डायबिटीज़ अब सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। युवाओं और बच्चों में भी यह तेजी से फैल रही है। वर्ल्ड डायबिटीज़ डे के अवसर पर यथार्थ अस्पताल, सेक्टर-110 नोएडा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने बताया कि ओपीडी में आने वाले हर पाँचवें मरीज को डायबिटीज़ की समस्या है। कोविड के बाद मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।
अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट और हेड, इंटरनल मेडिसिन डॉ. मंजू त्यागी ने कहा कि कोविड संक्रमण के बाद कई युवाओं में ब्लड शुगर स्तर बढ़ा पाया गया है। पैंक्रियास पर वायरस का असर और मानसिक तनाव इस बीमारी के प्रमुख कारण बने हैं। उन्होंने कहा कि असंतुलित जीवनशैली, नींद की कमी और गलत खानपान ने खतरे को और बढ़ा दिया है।
डॉ. प्रखर गर्ग, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर में करीब 25 से 26 प्रतिशत लोग डायबिटीज़ से प्रभावित हैं। अब युवाओं और कामकाजी महिलाओं में भी इसके नए मामले लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि “नियमित शुगर टेस्ट और समय-समय पर हेल्थ चेकअप से बीमारी को शुरुआती दौर में ही नियंत्रित किया जा सकता है।”
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. आशीष गुप्ता ने कहा कि मोटापा और बढ़ता स्क्रीन टाइम अब डायबिटीज़ की बड़ी वजहें बन गए हैं। उन्होंने कहा, “लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर पर रहने से शरीर की गतिविधियाँ कम हो जाती हैं, जिससे वजन बढ़ता है और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है।”
डॉ. पोटलुरी चेतन, कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक्स, ने कहा कि बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे बच्चों को आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रेरित करें, मोबाइल-टीवी का समय सीमित करें और पौष्टिक भोजन दें, ताकि भविष्य में डायबिटीज़ जैसी बीमारियाँ न हों।
डॉक्टरों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज़ के मामले 10 से 14 प्रतिशत तक देखे जा रहे हैं, जबकि बच्चों में लगभग 1 प्रतिशत डायबिटिक और 15 प्रतिशत प्रीडायबिटिक पाए जा रहे हैं।
डॉ. मंजू त्यागी ने कहा कि मोटापा और डायबिटीज़ जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए यथार्थ अस्पताल, नोएडा सेक्टर-110 में एक विशेष “ओबेसिटी क्लिनिक” शुरू की गई है, जहाँ मरीजों को जांच, परामर्श और उपचार की सभी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
अस्पताल की सीईओ डॉ. गौतमी ए. वी. ने कहा कि “हमारा ध्यान सिर्फ इलाज पर नहीं बल्कि रोकथाम पर भी है। समय-समय पर जागरूकता अभियान और हेल्थ चेकअप के माध्यम से हम लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।”
डॉक्टरों ने जनता से अपील की कि अगर परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास हो, तो नियमित शुगर टेस्ट करवाएँ और किसी भी लक्षण को हल्के में न लें।