
नोएडा। सेक्टर 82 पॉकेट 12 में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन का दृश्य भक्ति, आनंद और उल्लास से सराबोर रहा। कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज ने भक्तों को नारद मोह, जय-विजय श्राप और श्रीराम जन्म की पवित्र कथा से भाव-विभोर कर दिया। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा वातावरण गूंजा दिया।स्वामी पंचमानंद जी ने बताया कि नारद जी भगवान की साधना में लीन रहते हैं, ऐसे में कामदेव उनकी तपस्या भंग करने का प्रयास करता है, परंतु विफल रहता है। इससे नारद जी को अहंकार हो जाता है। जब वे यह बात ब्रह्मा, शिव और विष्णु भगवान को बताते हैं, तब भगवान विष्णु अपनी माया से नारद जी के गर्व का नाश करते हैं। इसी क्रम में कथा व्यास ने श्रीराम जन्म का रोमांचक प्रसंग सुनाया —राजा दशरथ निःसंतान होने के कारण चिंतित रहते हैं। गुरु के परामर्श पर वे श्रृंगी ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाते हैं। यज्ञ के दौरान अग्निदेव प्रकट होकर खीर लेकर आते हैं, जिसे तीनों रानियों में बांटा जाता है। समय आने पर महारानी कौशल्या से श्रीराम, सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न, तथा कैकयी से भरत का जन्म होता है। अयोध्या में खुशियों की लहर दौड़ जाती है।कथा स्थल पर राम जन्मोत्सव का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। भक्तों ने भजन और कीर्तन के साथ झूमकर प्रभु का जन्मोत्सव मनाया। वातावरण में शंखनाद और घंटियों की ध्वनि से श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत संगम दिखाई दिया।श्रीराम कथा आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी देव मणि शुक्ल ने बताया कि आगामी 6 अक्टूबर को कथा में बाल लीला, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा, अहिल्या उद्धार आदि प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा।इस अवसर पर नोएडा के कई सेक्टरों से सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य माना।पत्रकार प्रमोद दीक्षित ने बताया कि “श्रीराम कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को मर्यादा, भक्ति और संस्कार से जोड़ने वाली जीवन प्रेरणा है। ऐसे आयोजनों से समाज में एकता, संयम और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।”प्रमोद दीक्षित ने आगे कहा कि “कथा वाचक स्वामी पंचमानंद जी महाराज की शैली में ज्ञान और भक्ति का अद्भुत समन्वय है। उनकी वाणी में जो मधुरता और अर्थ की गहराई है, वह सीधे हृदय में उतर जाती है।”नोएडा के सांस्कृतिक आयोजनों में लगातार सक्रिय रहे पत्रकार प्रमोद दीक्षित ने यह भी कहा कि “राम कथा जैसे आयोजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज में अध्यात्म की ऊर्जा फैलाना है। यह हमारी परंपरा, हमारी पहचान और हमारी आध्यात्मिक धरोहर का उत्सव है।”समापन में भक्तों ने दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम की आरती की और प्रभु के जन्मोत्सव पर मंगल गीतों की गूंज देर रात तक सुनाई देती रही।
