नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित

नोएडा। वर्ल्ड कैंसर डे से पहले मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा ने कैंसर के आधुनिक इलाज और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धति को लेकर एक विशेष पब्लिक अवेयरनेस सेशन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को यह समझाना था कि कैंसर का इलाज अब एक जैसी पद्धति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हर मरीज की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत उपचार रणनीति अपनाई जा रही है। कार्यक्रम इस वर्ष की वैश्विक थीम “यूनाइटेड बाई यूनिक” के अनुरूप रहा, जिसमें एकजुट मेडिकल विशेषज्ञता और प्रत्येक मरीज की अलग पहचान पर जोर दिया गया।
अवेयरनेस सेशन में मेडिकल ऑन्कोलॉजी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, एंडोक्राइन एवं ब्रेस्ट सर्जरी तथा हीमेटो ऑन्कोलॉजी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे विभिन्न विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञ मौजूद रहे। सभी डॉक्टरों ने कैंसर के बदलते स्वरूप, इलाज में तकनीकी प्रगति और मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
विशेषज्ञों ने बताया कि आज कैंसर उपचार में “यूनाइटेड” का अर्थ है विभिन्न ऑन्कोलॉजी स्पेशलिटीज का आपसी समन्वय, जबकि “यूनिक” हर मरीज के कैंसर के प्रकार, स्टेज, जेनेटिक प्रोफाइल और संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर तैयार की गई व्यक्तिगत उपचार योजना को दर्शाता है। इस समन्वित दृष्टिकोण से न केवल इलाज के परिणाम बेहतर हो रहे हैं, बल्कि मरीजों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर एवं हेड डॉ. सज्जन राजपुरोहित ने बताया कि प्रिसिशन ऑन्कोलॉजी ने कैंसर के इलाज की दिशा ही बदल दी है। अब ट्यूमर के जेनेटिक और मॉलेक्यूलर विश्लेषण के आधार पर दवाओं और थेरेपी का चयन किया जाता है। इम्यूनोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों से कैंसर सेल्स पर सटीक हमला संभव हो पा रहा है, जिससे साइड इफेक्ट्स कम होते हैं और मरीज बेहतर जीवन जी पाते हैं।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी (हेड एंड नेक कैंसर) विभाग के डायरेक्टर डॉ. आलोक ठक्कर ने रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस तकनीक से जटिल कैंसर सर्जरी में अधिक सटीकता आई है। न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया के कारण रक्तस्राव कम होता है, दर्द घटता है और मरीज तेजी से रिकवर करता है। हेड एंड नेक कैंसर जैसे संवेदनशील मामलों में यह तकनीक शरीर की जरूरी संरचनाओं को सुरक्षित रखते हुए बेहतर परिणाम देती है।
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. दीपक कुमार मित्तल ने कहा कि रेडिएशन थेरेपी में इमेज-गाइडेड और इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड तकनीकों ने इलाज को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाया है। प्रोटॉन थेरेपी जैसी उन्नत विधियां आसपास के स्वस्थ अंगों को कम नुकसान पहुंचाते हुए ट्यूमर पर सटीक रेडिएशन देने में सहायक हैं, जिससे दीर्घकालिक दुष्प्रभावों में कमी आती है।
एंडोक्राइन और ब्रेस्ट सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. वी. सीनू ने बताया कि शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी कैंसर के सफल इलाज की कुंजी है। मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम द्वारा सामूहिक मूल्यांकन से सर्जरी, मेडिकल और रेडिएशन थेरेपी को बेहतर ढंग से जोड़ा जा रहा है, जिससे मरीज को संतुलित और प्रभावी उपचार मिल रहा है।
वहीं, हीमेटो ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग की डायरेक्टर डॉ. ईशा कौल ने कहा कि ब्लड कैंसर के क्षेत्र में टार्गेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट ने नई उम्मीदें जगाई हैं। जो बीमारियां पहले लाइलाज मानी जाती थीं, वे अब नियंत्रित और कई मामलों में पूरी तरह ठीक की जा सकती हैं।
अवेयरनेस सेशन के दौरान डॉक्टरों ने अर्ली डिटेक्शन, नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली को कैंसर के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए बेहद जरूरी बताया। मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा ने इस पहल के जरिए यह संदेश दिया कि जब विशेषज्ञ एकजुट होकर काम करते हैं और इलाज मरीज की जरूरत के अनुसार तय होता है, तब कैंसर से लड़ाई अधिक प्रभावी और मानवीय बनती है।