
नोएडा उत्तर प्रदेश में 13 नवंबर को निर्धारित विधानसभा चुनावों को अब 20 नवंबर तक स्थगित कर दिया गया है। चुनाव आयोग के इस फैसले का मुख्य कारण कार्तिक पूर्णिमा का पर्व बताया गया है, जो 15 नवंबर को मनाया जाएगा। इस निर्णय पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि चुनाव से ठीक पहले यह स्थगन राजनीतिक साज़िशों के इशारे की तरह प्रतीत हो रहा है।
पूर्व मीडिया प्रभारी और कानूनी छात्र सुरज भारद्वाज ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कहा कि मैं सपा से पहले भी तमाम पार्टी में काम कर चूका हूं मगर भारतीय जनता पार्टी जैसी कूट नीति मैने कहीं नहीं देखी इसमें सोचने की बात ये भी है की
पंचांग के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की शुरुआत 15 नवंबर को सुबह 06:19 बजे होगी, जबकि चुनाव 13 नवंबर को होने वाले थे। सुरज भारद्वाज ने इस स्थगन को भाजपा द्वारा एक रणनीति के रूप में देखा है, जिसमें उत्तरप्रदेश में 37 सीटें खोने की चिंता है।
यह केवल आरएलडी और बीजेपी के दवाब मे लिए गए चुनाव आयोग का फैसला है ? या फिर यह वास्तव में एक बड़ी घटना की ओर इशारा कर रहा है?” उन्होंने सवाल किया। लाखो लोग मेले में आने वाले हैं तारीख के हिसाब से चुनाव पहले है और गंगास्नान बाद में है तो चुनाव आयोग ने ये फैसला क्यों लिया
सुरज भारद्वाज ने यह भी उल्लेख किया कि भाजपा के शासन में हुई पुलवामा और उड़ी जैसे हमले का राजनीतिक लाभ सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को हुआ हैं। सूरज भारद्वाज को आशंका है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में कोई बड़ी घटना सामने न आए?
इस स्थगन के संदर्भ में, सुरज भारद्वाज का मानना है कि प्रशासन को मेले में सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए। यह स्थिति सभी विपक्ष के राजनीतिक दलों के लिए एक गंभीर प्रश्न है। क्या यह स्थगन एक बड़ी साजिश का हिस्सा है? या फिर यह वास्तव में मतदान में भागीदारी बढ़ाने का एक प्रयास है? उत्तर प्रदेश की राजनीति, जो पूरे देश की दिशा को प्रभावित करती है, इस्मे यह सवाल काफी महत्वपूर्ण है इसमे भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव आयोग को दिए पत्र में ये लिखा है की 3-4 दिन पहले लोग गंगा स्नान के लिए चले जाते हैं बहुसंख्यक समुदाय के लोगों के मतदान से वंचित रह जाने की टेंशन बन गई थी. इसके चलते हिंदू वोटों के कम वोटिंग होने का भी खतरा था, चिंता का विषय कुछ यूं आया की यह अगर वास्तव में मतदान में भागीदारी बढ़ाने का प्रयास है तो अभी निकले लोकसभा के चुनाव में ना ही कोई गंगा स्नान था ना ही कोई भेद भाव किया गया विपक्ष की तरफ से फिर भी उत्तरप्रदेश में बड़ी हार का भारतीय जनता पार्टी को सामना करना पड़ा तो ये अजीब तर्क रालोद और भाजपा ने चुनाव आयोग को क्यों पेश किया।