
दिल्ली, 5 सितम्बर 2025एआईआईएफए (AIPA) सस्टेनेबल स्टील मैन्यूफैकर्स एसोसिएशन को देशभर में 1.800 में अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है. ने भारत के इस्पात क्षेत्र को मजबूती और वैक्षिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए मामकरे, सात विकास प्रथाओं और कराक्षन में व्यापक सुधार की मांग की है। देश के कुल इस्पात उत्पादन में लगभग 47% योगदान देने वाला द्वितीया इस्या क्षेत्र विकेन्द्रीकृत औद्योगिक विकास, अर्थ-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, और 2030 तक 300 मिलियन टन इस्पात क्षमता के भारत के लक्ष्य को समर्थन देने में अहम भूमिका निभा रहा है।इसके महत्व के बावजूद, यह क्षेत्रमा की कीमत में अस्ति ऊर्जा सागर, सॉजिस्टिक अक्षमताओं और शिकार्बोनाइजेशन कार्बन उत्सर्जन घटाने के दबाव जैसी चुनौतियों से रहा है। आईआईएफए में चोर देकर कहा कि क्षेत्र की पूरी श्रमाता का दोहन करने के लिए नाश नीतिगत और संस्करामक हस्तक्षेप आमएक हैं।इसी संदर्भ में एआईआईएफ मैन्युफैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ महाराष्ट्र (MAM) के सहयोग से भारत सरकार के इस्पात तय के संरक्षण में और रात दास कार्यक्रम (UNCIP) के समर्थन से एआईआईएफए स्टीलेक्स-2025 (STEELEX-2025) का आयोजन करेगा, जिसे व्यापक रूप से इस्पात उद्योग का महाकुंभ माना जाता है।यह कार्यक्रम 10-20 सितम्बर 2020 को बॉम्बे एक्तिविशन सेंटर, गोरेगांव, मुंबई में वें राष्ट्रीय इस सम्मेलन के साथ आयोजित होगा। इस मुख्य विषय होगा यान इंडस्ट्री, वन डेस्टिनेशन” (एक उद्योग, एका गंतव्य)। इसमें 300 से अधिक प्राइक और 3.500 से ज्यादा प्रतिनिधियों के भाग ऐने की संभावना है। चर्चा के मुख्म बिंदु होंगे: डिकार्बोनाइजेशन हाइड्रोजन-आधारित इस्पात निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा का समावेश को माल की सुरक्षा, सर्कुलर इकोनोंगी माँवस और यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एशामटमेंट मैकेनिजा (CEAM) जैगी वैश्विक व्यापार चुनौतियां।एआईआईएफए सस्टेनेबत स्टीत मैन्युफैकवार्स एसोसिएशन के आक्ष श्री योगेश मंधानी ने बीईएस (मध्य) मानकों की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत की विविध भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए वन-साइन किट्स ऑत’ (एक जैसा नियम सबके लिए) रहिको उपयुक्त नहीं है। जनोंने आईएस: 1780 से महावपूर्ण मानकों में पीग परिनितियों के अनुसार संशोधन की मांग की और भारतीय मानक ब्यूरो (BMS) में प्रदर्शन-आधारित डांबा अपनाने का आह किया, विकारों मजबूती भापन और स्थाविश्य सुनिहित हो सके और साथ ही निर्माताओं को नवाचार औरत की अपनाने की स्वतंत्रता मिले।की मंधी ने आगे कहा कि चीन स्ट्रीत की और संक्रमण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता ही नहीं बल्कि रणनीतिक विकास का आप भी है। कैम-धारित उत्पादन मॉडल के कारण द्वितीयक इस्पात क्षेत्र इस परिवर्तन का नेतृत्व करने की अनूठी स्थिति में है। यह ऊर्जा कुराल तकनीकों, नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन कमी उपायों को लागू कर संबंधया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि कार्बन केटि साभ किफायती नवीकरणीय ऊर्जाऔर चीन अटीत धरियोजनाओं के लिए लक्षित वितीय प्रोत्साहन प्रदान करे, ताकि भारत सतत इस्पात उत्पादन का वैश्विक केंद्र बन सके।आईआईएफए सस्टेनेबल स्टॉलमेन्यू एसोसिएशन के मानद महासचिव श्री कमल अग्रवाल ने एक और गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला लेनदेन में जीएसटी अनुपालन। छोटे और असंगठित आपूर्तिकर्ता अवसर औपचारिक द्वांचे से बाहर काम करते हैं, जिसके कारण अनुपालन का बोझ द्वितीयक इस्पमा उत्पादकों पर आसमान रूप से पहल है। उन्होंने और द्वाये को सरत और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर बत्त दिया, जिससे छोटे आपूर्तिकर्ता भी कर प्रागली में शामिल हों। इस सर्कुलर इकोनॉमी मजबूत होगी, अनुपालन में सुधार होगा और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।अंत में, श्री मंधानी ने दोहराया कि भारत का इस्पात क्षेत्र एक निर्णायक मोड पर खड़ा है। यदि मानकों का आधुनिकीकरण किया जाए, गौन सहीत रोडमैप की तेजी की आगे बढ़ाया जाए और जीएसटी ढांचे को सरल बनाया जाए, तो भारत एक अधिक मजबूत बीता और वैश्विक पर प्रतिष्पर्धी इस्पात उद्योग का निर्माण कर सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और उद्योग के समन्वित प्रयासों से भारत न केवल अपने चहेतु विकास लक्ष्यों को प्राप्त करेगा बल्कि बैंक लोन अधोवा में भी एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित होगा।
