
नोएडा से संवाददाता — प्रमोद दीक्षित
नोएडा में इस बार छठ पर्व की तैयारियों पर प्रशासनिक लापरवाही का साया मंडरा रहा है। कालिंदी कुंज यमुना घाट, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु उगते सूरज को अर्घ्य देते हैं, इस बार नोएडा प्राधिकरण और सिंचाई विभाग के विवाद की भेंट चढ़ गया है।
छठ पूजा सेवा समिति, जो पिछले 20 वर्षों से इस घाट की व्यवस्था संभालती आ रही है, ने निरीक्षण के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं कि घाट की हालत बद से बदतर है—कहीं मिट्टी छह फीट ऊंची तो कहीं कीचड़ और कूड़े का अंबार।
पत्रकार प्रमोद दीक्षित ने बताया कि लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना के बावजूद सफाई और लेवलिंग का काम कछुआ गति से चल रहा है। मात्र 10 मजदूरों से कई किलोमीटर लंबे घाट की व्यवस्था संभालने की कोशिश, किसी मज़ाक से कम नहीं। सवाल यह है कि जब हर साल यही घाट छठ का मुख्य केंद्र रहता है, तो फिर प्रशासन हर बार आख़िरी वक्त पर क्यों जागता है?
छठ पूजा सेवा समिति के अध्यक्ष सुजीत केसरी ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंचेगी। सलाहकार अविनाश सिंह ने कहा कि प्राधिकरण और सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए — “आस्था का पर्व है, इसे अव्यवस्था का प्रतीक मत बनने दीजिए।”
पत्रकार प्रमोद दीक्षित ने प्रशासन से सवाल किया — “क्या छठ व्रतियों को स्वच्छ घाट और सुरक्षित माहौल देना भी अब विभागों के विवाद में फंस गया है?”
नोएडा की जनता अब देख रही है कि कौन-सा विभाग आगे आता है — या फिर इस बार भी आस्था, अफसरशाही के दलदल में फंसकर रह जाएगी।
