नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित

नोएडा चैत्र शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर चैती छठ महापर्व के चौथे और अंतिम दिन छठव्रतियों ने प्रातःकाल उदीयमान भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित कर चार दिवसीय पर्व का विधिवत समापन किया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। अखिल भारत हिन्दू महासभा एवं अखिल भारतीय प्रवासी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि छठव्रतियों ने नारियल, पकवान, लड़ुआ, बताशा, ईख, बद्धी, अगरबत्ती, सिंदूर और विभिन्न फलों को सूप में सजाकर विधि-विधान से सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया। व्रतधारियों ने जल और दूध से अर्घ्य देकर सूर्य उपासना की परंपरा का पालन किया। अर्घ्य देने के बाद छठव्रतियों ने सूर्यपिंड की पूजा की और तत्पश्चात प्रसाद ग्रहण किया। इसके बाद परिवारजनों और उपस्थित श्रद्धालुओं में छठ माता का प्रसाद वितरित किया गया। पूरे आयोजन के दौरान घाटों और जलाशयों पर भक्ति का माहौल बना रहा। उन्होंने बताया कि भगवान सूर्य की उपासना का यह महापर्व वर्ष में दो बार—चैत्र और कार्तिक माह में—मनाया जाता है। छठव्रती नदी, तालाब और कृत्रिम जलाशयों में खड़े होकर अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, पूर्वांचल, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी लाखों श्रद्धालु छठ महापर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाते हैं। वहीं विदेशों में बसे पूर्वांचल के लोग भी इस पर्व को अपनी परंपराओं के अनुसार मनाते हैं। उन्होंने बताया कि कार्तिक माह में मनाया जाने वाला छठ महापर्व अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित होता है। चार दिनों तक चले इस कठिन व्रत और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान सूर्य से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।