
दीपावली पर्व से पहले नोएडा और एनसीआर क्षेत्र से विभिन्न शहरों को जाने वाली वातानुकूलित निजी बसों में यात्रियों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। सामान्य दिनों में ₹600–₹700 का किराया लेने वाली बसें अब ₹3500 से ₹7300 तक वसूल रही हैं। यह स्थिति न केवल आम जनता के साथ खुला शोषण है, बल्कि परिवहन विभाग की लापरवाही और सरकारी परिवहन व्यवस्था की पूरी तरह विफलता को भी उजागर करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवा क्रांति सेना ने इस गंभीर मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, परिवहन आयुक्त, राज्य परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष, गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) और सांसद डॉ. महेश शर्मा को विस्तृत शिकायत पत्र भेजा है। संगठन ने मांग की है कि दोषी निजी बस ऑपरेटरों की सूची तैयार कर उनके परमिटों की जांच की जाए और अनियमितता पाए जाने पर तुरंत निलंबन या रद्दीकरण की कार्रवाई की जाए।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि गौतमबुद्ध नगर आरटीओ आखिर चुप क्यों है? जब बस ऑपरेटर खुलेआम मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 67 और 192A का उल्लंघन कर रहे हैं, तो आरटीओ विभाग कहां है? क्या यह सब उनकी जानकारी में नहीं हो रहा, या फिर मिलीभगत का खेल चल रहा है? ऐसे में शासन-प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
इस विषय पर युवा क्रांति सेना के अध्यक्ष अविनाश सिंह ने कहा कि यह आम नागरिकों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है। जब लोग त्योहारों पर अपने घर लौटना चाहते हैं, तब निजी बस संचालक उनकी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन अगर अब भी कार्रवाई नहीं करते, तो यह लूट आने वाले समय में और बढ़ेगी।
वहीं संगठन के संस्थापक राजेश अंबावता ने कहा कि यह सिर्फ परिवहन विभाग की विफलता नहीं, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय यात्रियों के साथ अन्याय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरटीओ और शासन दोनों को इस स्थिति की जिम्मेदारी लेनी होगी, क्योंकि अगर विभाग सख्त निगरानी रखता तो इतनी बड़ी लूट संभव ही नहीं थी।
पत्रकार प्रमोद दीक्षित की जानकारी के अनुसार, संगठन ने यह भी मांग की है कि दीपावली के अवसर पर अतिरिक्त स्पेशल बसें चलाई जाएं और आरटीओ कार्यालय की एक विशेष टीम सड़क पर सक्रिय रहे, ताकि यात्रियों से मनमाना किराया न लिया जा सके।
अब सवाल यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेगा, या आम जनता की जेब पर पड़ रहे इस भारी बोझ पर यूं ही चुप्पी साधे रहेगा? दीपावली की रौनक के बीच यात्रियों की पीड़ा सरकार की परीक्षा बन चुकी है।
