
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के गैपरा गांव में जन्मे परम पूज्य गुरुदेव स्वामी पंचमानंद जी महाराज, साधना, त्याग और भक्ति के प्रतीक हैं। निर्वाणी अखाड़े में श्रेष्ठ साधक और संत समाज के प्रिय लाडले के रूप में जाने जाने वाले गुरुदेव ने 14 वर्षों तक अन्न और जल का त्याग कर कठिन तपस्या की।🔥 गुरुदेव ने केवल एक लंगोटी पहनकर संगम तट पर भीषण सर्दी में तपस्या की, और आज वे अपने अनुयायियों के लिए भक्ति और साधना का प्रेरणास्त्रोत हैं।🚩 आज वे एक विशाल मंदिर का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें स्फटिक शिवलिंग, पवन सुत वनखंडी सरकार, अष्ट धातु से निर्मित श्री यंत्र, मां लक्ष्मी, भूवनेश्वरी, विद्या की देवी सरस्वती और राम दरबार का पावन दर्शन संभव है।💫 उनके जीवन का संदेश — “त्याग, भक्ति और सेवा ही सच्चा साधना मार्ग है।”जो उनके सानिध्य में आते हैं, वे आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन बदलने वाला अनुभव पाते हैं।#गुरुदेव #रामकथा #भक्ति #साधना #त्याग #स्वामीपंचमानंदजी #नोएडा #आस्था