अमेरिका में फेडरल गवर्नमेंट ने नवंबर में $669 अरब खर्च किए जो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार से ज्यादा है। आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत के फॉरेक्स रिजर्व करीब $655 अरब है। इस खर्च की बदौलत अमेरिका सरकार का पिछले छह महीने का औसत मासिक खर्च $600 अरब पहुंच गया है। यह 2020-21 के उच्चतम स्तर के बेहद करीब है। तब कोरोना महामारी के कारण आक्रामक इकनॉमिक स्टीम्यूलस दिया गया था। सरकार का खर्च तो बढ़ रहा है लेकिन उसकी रिसीट लगातार घट रही है। नवंबर में यह $380 अरब रह गया। यह लगातार 17वां महीना है जब सरकार का खर्च उसकी कमाई यानी रेवन्यू से ज्यादा रहा है। इस दौरान अमेरिका का कर्ज $27 ट्रिलियन से बढ़कर $36.2 ट्रिलियन पहुंच गया है।

अमेरिका में कर्ज की स्थिति के और बदतर होने की आशंका है। माना जा रहा है कि अगले दशक के दौरान सरकार के कुल टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन का करीब 25% कर्ज के ब्याज का भुगतान करने में जा सकता है। यह तब होगा यदि अगले दशक के दौरान ब्याज दर नहीं बढ़ती है और मंदी नहीं आती है। अगर देश में मंदी आती है तो स्थिति और बदतर हो सकती है। तीसरी तिमाही में सालाना नेट इंटरेस्ट कॉस्ट 1.12 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। परसेंटेज के रूप में देखा जाए तो यह 2022 के मुकाबले दोगुना होगा। यह 1990 के दशक में 20 फीसदी था।