नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित

नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली के खिलाफ एक बार फिर किसानों का आक्रोश सामने आया है। गांव शाहपुर गोवर्धनपुर के किसानों ने भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी के नेतृत्व में सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। किसानों का आरोप है कि खसरा संख्या 505, 506, 507, 508 और 532 की भूमि पर स्थित उनकी पुश्तैनी आबादी को 8 अप्रैल 2026 को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही थी, जबकि वर्ष 2007 में प्राधिकरण द्वारा इस भूमि को आबादी मानते हुए छोड़ा जा चुका है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा न केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही थी, बल्कि किसानों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें भू-माफिया तक बताया जा रहा है, जिससे उनमें भारी रोष व्याप्त है। किसानों के विरोध के बाद नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल ने हस्तक्षेप करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करने के निर्देश दिए। साथ ही एक जांच टीम का गठन किया गया है, जो 9 और 10 अप्रैल 2026 को संबंधित खसरों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेगी। टीम में उमेश त्यागी, अंकित राजपूत (प्रबंधक, वर्क सर्कल-9), महेश कुमार (राजस्व निरीक्षक), सीमा यादव, प्रमोद रावत (लेखपाल), सुभाष चंद्र और हरेंद्र मलिक (अवर अभियंता) शामिल हैं। भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बैठक किसानों के हितों की अनदेखी कर केवल बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए आयोजित की गई थी। किसानों की समस्याओं को बैठक में स्थान नहीं दिया गया और उन्हें लगातार झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो जल्द ही बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं भी मौजूद रहीं, जिन्होंने एकजुट होकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की।किसानों के विरोध के बाद टली ध्वस्तीकरण कार्रवाई, नोएडा प्राधिकरण की नीतियों पर उठे सवाल नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली के खिलाफ एक बार फिर किसानों का आक्रोश सामने आया है। गांव शाहपुर गोवर्धनपुर के किसानों ने भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल त्यागी के नेतृत्व में सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। किसानों का आरोप है कि खसरा संख्या 505, 506, 507, 508 और 532 की भूमि पर स्थित उनकी पुश्तैनी आबादी को 8 अप्रैल 2026 को ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही थी, जबकि वर्ष 2007 में प्राधिकरण द्वारा इस भूमि को आबादी मानते हुए छोड़ा जा चुका है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा न केवल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही थी, बल्कि किसानों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें भू-माफिया तक बताया जा रहा है, जिससे उनमें भारी रोष व्याप्त है। किसानों के विरोध के बाद नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल ने हस्तक्षेप करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करने के निर्देश दिए। साथ ही एक जांच टीम का गठन किया गया है, जो 9 और 10 अप्रैल 2026 को संबंधित खसरों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेगी। टीम में उमेश त्यागी, अंकित राजपूत (प्रबंधक, वर्क सर्कल-9), महेश कुमार (राजस्व निरीक्षक), सीमा यादव, प्रमोद रावत (लेखपाल), सुभाष चंद्र और हरेंद्र मलिक (अवर अभियंता) शामिल हैं। भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अशोक चौहान ने प्राधिकरण की 222वीं बोर्ड बैठक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह बैठक किसानों के हितों की अनदेखी कर केवल बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए आयोजित की गई थी। किसानों की समस्याओं को बैठक में स्थान नहीं दिया गया और उन्हें लगातार झूठे आश्वासन देकर गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो जल्द ही बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं भी मौजूद रहीं, जिन्होंने एकजुट होकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की।