
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा, उत्तर प्रदेश (इंडिया)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 को हेल्थ सेक्टर के लिए एक दूरदर्शी और परिवर्तनकारी बजट माना जा रहा है। इस बजट में इलाज तक सीमित रहने के बजाय इलाज की लागत कम करने, दवाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और भारत को वैश्विक स्वास्थ्य शक्ति के रूप में स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है। सस्ती दवाओं से लेकर बायोफार्मा हब, रिसर्च, मेडिकल एजुकेशन और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तक बजट में एक स्पष्ट और दीर्घकालिक रोडमैप नजर आता है।
फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. डी.के. गुप्ता ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हेल्थ सेक्टर के लिए यह बजट पब्लिक हेल्थ के लिहाज से गेम-चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहली बार इतने व्यापक स्तर पर यह स्वीकार किया है कि इलाज की सबसे बड़ी समस्या उसकी लागत है और इसका समाधान दवाओं को सस्ता करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने में है।
डॉ. डी.के. गुप्ता के अनुसार, बजट में मधुमेह और कैंसर जैसी गंभीर और तेजी से बढ़ती बीमारियों की दवाओं को सस्ता करने की दिशा में जो कदम उठाए गए हैं, उनसे आम मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इन बीमारियों का इलाज लंबे समय तक चलता है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। दवाओं की कीमत कम होने से इलाज अधिक सुलभ और किफायती बनेगा।
इस बजट की सबसे अहम घोषणाओं में ‘बायोफार्मा शक्ति पहल’ शामिल है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर दवाओं के लिए एक मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना है। वर्तमान में भारत कई अहम बायोलॉजिक दवाओं के लिए आयात पर निर्भर है, जिससे इलाज की लागत बढ़ जाती है। इस पहल से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में दवाओं का उत्पादन सस्ता और सुलभ बनेगा।
डॉ. डी.के. गुप्ता ने कहा कि बायोफार्मा उत्पादन को बढ़ावा देने का सीधा लाभ मधुमेह और कैंसर के मरीजों को मिलेगा। घरेलू स्तर पर बायोलॉजिक दवाओं के निर्माण से लागत घटेगी, जिससे निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में इलाज का खर्च कम होगा। इससे आम लोगों पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव भी घटेगा और हेल्थकेयर सिस्टम अधिक संतुलित होगा।
बजट में फार्मास्युटिकल शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। ये संस्थान एडवांस्ड फार्मा एजुकेशन, रिसर्च और इनोवेशन पर काम करेंगे। डॉ. डी.के. गुप्ता के अनुसार, यह कदम भारत को केवल दवाओं का निर्माता नहीं, बल्कि वैश्विक रिसर्च हब बनाने की दिशा में भी अहम साबित होगा।
दवा अनुसंधान को गति देने के लिए पूरे इंडिया में 1000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का नेटवर्क तैयार करने का भी प्रस्ताव है। इससे नई दवाओं और थेरेपी के परीक्षण और मंजूरी की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही क्लिनिकल रिसर्च में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा, जिससे विदेशी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
बजट में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी खास ध्यान दिया गया है। जिला अस्पतालों को अपग्रेड करने और इमरजेंसी वार्ड की क्षमता बढ़ाने का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। गंभीर इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही सरकार द्वारा पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाने की घोषणा की गई है, जहां इलाज के साथ मेडिकल ट्रेनिंग और रिसर्च की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
इसके अलावा तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की स्थापना की घोषणा को भी हेल्थ सेक्टर के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। बजट में मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने का भी प्रावधान किया गया है, जो बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मद्देनजर अत्यंत जरूरी माना जा रहा है। साथ ही तीन नए आयुर्वेद संस्थानों और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स से जुड़े संस्थानों के अपग्रेड का प्रस्ताव भी शामिल है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 को हेल्थ सेक्टर के लिए एक मजबूत, संतुलित और दूरदर्शी बजट माना जा रहा है, जो इलाज को सस्ता, सुलभ और टिकाऊ बनाने के साथ भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की ओर ले जाने की क्षमता रखता है।