
कानपुर जनपद के ग्राम जगदीशपुर में सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार गया से विधिवत पिंडदान एवं कर्मकांड संपन्न कर लौटने के उपरांत गयाभोज तथा पितृमोक्ष की कामना से श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन स्वर्गीय चंद्रभूषण त्रिपाठी एवं उनकी पत्नी स्वर्गीय बिंदेश्वरी त्रिपाठी की पारिवारिक परंपरा के निर्वहन के उद्देश्य से किया गया।
पत्रकार प्रमोद दीक्षित ने बताया कि सनातन परंपरा में गया जाकर पितरों का विधिवत कर्मकांड पूर्ण करने के बाद घर पर गयाभोज कराना आवश्यक माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्राम जगदीशपुर में यह आयोजन पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया, जिसमें पितरों की प्रसन्नता, शांति और मुक्ति की कामना की गई।
श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन इसलिए किया गया क्योंकि शास्त्रों में वर्णित है कि संतानों द्वारा भागवत कथा का आयोजन एवं श्रवण पितरों के कल्याण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। पत्रकार प्रमोद दीक्षित के अनुसार, इस धार्मिक आयोजन में स्वर्गीय चंद्रभूषण त्रिपाठी के तीनों पुत्र — बड़े पुत्र राम बिहारी तिवारी, दूसरे पुत्र श्री नारायण तिवारी तथा सबसे छोटे पुत्र हरिनारायण तिवारी — की सक्रिय भूमिका रही।

आयोजन के प्रथम दिवस वैदिक विधि-विधान के साथ भव्य कलश यात्रा निकालकर धार्मिक कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई। यह कलश यात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होकर विभिन्न मंदिरों तक पहुंची। ढोल-नगाड़ों, शहनाई की मधुर धुनों और जयघोष के नारों से पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
पत्रकार प्रमोद दीक्षित ने बताया कि कलश यात्रा एवं कथा आयोजन में नाते-रिश्तेदारों, गांव के लोगों, मित्रों एवं इष्ट-मित्रों की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पूरे गांव में धार्मिक उत्साह देखने को मिला और जगह-जगह जल सेवा की व्यापक व्यवस्था भी की गई।
पूरे आयोजन के दौरान ग्रामीणों में विशेष उत्साह और आस्था देखने को मिली। श्रद्धालुओं का कहना था कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन पितृपरंपरा के निर्वहन के साथ-साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करते हैं
