
नोएडा संवाददाता प्रमोद दीक्षित
नोएडा। सेक्टर-77 के सामने स्थित मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भक्तिरस की अविरल धारा देखने को मिली। कथा व्यास आचार्य कृपा शंकर महाराज ने अपनी मधुर वाणी में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथा स्थल पर सुबह से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया था। दोपहर होते-होते मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। सैकड़ों की संख्या में सनातन प्रेमियों ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आचार्य कृपा शंकर महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग के माध्यम से बताया कि अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने धरती पर अवतार लिया। उन्होंने कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव की कारागार लीला और नंदगोप के घर आनंदोत्सव का सजीव चित्रण किया।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” जैसे जयघोषों से मंदिर परिसर गूंज उठा। चौथे दिन की कथा का प्रमुख आकर्षण भक्त प्रहलाद और भगवान नरसिंह की लीला रही। आचार्य जी ने हिरण्यकश्यप के अहंकार और उसके अंत का वर्णन करते हुए कहा कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
इस अवसर पर प्रस्तुत भव्य झांकी ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान नरसिंह के उग्र रूप, भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और नारद मुनि की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ भक्ति भाव प्रकट किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में विशेष उत्साह देखने को मिला।
आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए बैठने, जलपान और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की गई थी। स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। प्रवचन के दौरान आचार्य कृपा शंकर महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलाने की प्रेरणा है। उन्होंने युवाओं से सनातन संस्कृति को अपनाने और सदाचार को जीवन में उतारने का आह्वान किया।
कथा के समापन पर विधिवत आरती और प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने बताया कि आगामी दिनों में श्रीकृष्ण की अन्य लीलाओं, गोवर्धन पूजा और रासलीला का वर्णन किया जाएगा। चौथे दिन की कथा ने यह स्पष्ट कर दिया कि श्रीमद्भागवत कथा सनातन आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का अनुपम संगम है।