
नोएडा संवाददाता: प्रमोद दीक्षित, समय संदेश टाइम्स
“समय संदेश टाइम्स — बदलते समय का संदेश”
गौतमबुद्धनगर जिले के रबूपुरा क्षेत्र में दलित समाज के युवक अनिकेत की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। लगभग 10 दिन पहले एक विशेष समुदाय के लोगों ने अनिकेत पर जानलेवा हमला किया था। वह तब से वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। लेकिन प्रशासन की लापरवाही और सत्ता की खामोशी के बीच आखिरकार उसकी सांसें थम गईं।
पार्टी के कार्यकर्ता राहुल अवाना ने इस पूरे मामले को उठाया और तत्काल अस्पताल जाकर परिवार की मदद की। जब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को यह जानकारी दी गई, तो उन्होंने छोटी दीपावली के दिन अनिकेत के परिवार को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की और आगे भी हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
लेकिन सवाल यह है कि —
➡️ पिछले 10 दिनों तक सत्ता के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी कहां थे?
➡️ योगी सरकार की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति आखिर इस मामले में क्यों सो गई?
➡️ जब किसी और धर्म या वर्ग का मामला होता है तो पुलिस 24 घंटे में गोली चला देती है, तो यहां अपराधियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
➡️ क्या इंसाफ़ की कीमत अब जाति देखकर तय होगी?
अब जब अखिलेश यादव द्वारा की गई आर्थिक मदद से यह मुद्दा सुर्खियों में आया, तो जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह वीडियो बनाकर सहानुभूति जताने लगे। लेकिन सवाल उठता है — जब अनिकेत ज़िंदगी की जंग लड़ रहा था, तब यह संवेदना कहां थी?
परिवार आज भी न्याय की आस में है। जनता पूछ रही है —
👉 अगर सरकार को वास्तव में इस परिवार की चिंता है, तो उन्हें 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी क्यों नहीं दी जाती?
👉 और जो अपराधी खुले घूम रहे हैं, क्या उनका भी “एनकाउंटर” उतनी ही तेजी से होगा जितना सरकार दावा करती है?
यह केवल एक परिवार की कहानी नहीं है — यह सवाल है उस सिस्टम से, जो इंसाफ़ को जाति और सियासत के तराजू में तौलता है।
अनिकेत अब नहीं रहा, लेकिन उसकी चीख आज भी सत्ता की दीवारों से टकरा रही है…
समय संदेश टाइम्स — बदलते समय का संदेश
नोएडा संवाददाता: प्रमोद दीक्षित