
नोएडा स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने इस वर्ष दिवाली उत्सव को एक नए आयाम के साथ मनाया — जहाँ खुशियाँ, सृजनशीलता और संवेदना एक साथ झिलमिला उठीं। फाउंडेशन के नन्हे दिव्यांग कलाकारों ने अपनी मेहनत और कल्पनाशीलता से न केवल सुंदर दीये, मोमबत्तियाँ, चॉकलेट और सजावट का सामान तैयार किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि सच्ची रोशनी सीमाओं से नहीं, सोच से पैदा होती है।
इस विशेष आयोजन में बच्चों के साथ उनके माता-पिता भी उपस्थित रहे। माँ-बेटे की जोड़ी द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक नृत्य ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। अन्य बच्चों ने भी नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को उल्लास और उमंग से भर दिया। यह क्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक बन गया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध अभिनेत्री निमरत कौर ने फाउंडेशन का दौरा किया और बच्चों के साथ दिवाली की खुशियाँ साझा कीं। उन्होंने बच्चों के साथ दीये सजाए, मिठाइयाँ बाँटी और उनके आत्मविश्वास की सराहना की। उनके स्नेह और सरलता ने बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और दिलों में नई ऊर्जा भर दी।
वहीं उत्तराखंड के हैंडलूम मंत्री श्री वीरेन्द्र दत्त सेमवाल ने फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए बच्चों द्वारा बनाए गए दीये और मोमबत्तियाँ मंगवाकर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि “सीमाएँ शरीर की नहीं, सोच की होती हैं” — और फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन इसका सजीव उदाहरण है।
इस अवसर पर भारत की पहली फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. सुनीता सूद और डॉ. भावना आनंद की विशेष उपस्थिति ने समारोह को और भी प्रेरक बना दिया। उनकी प्रेरक बातें और स्नेहिल व्यवहार ने बच्चों के आत्मविश्वास को नई दिशा दी।
फाउंडेशन के निदेशक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. महिपाल सिंह और डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुष्मिता भाटी, प्रशासन प्रमुख कृष्णा यादव, स्पेशल एजुकेटर इलिका रावत, सोशल व डिजिटल मीडिया मैनेजर सौम्या सोनी तथा सेंटर मैनेजर सुरभि जैन सहित पूरी टीम कार्यक्रम में मौजूद रही।
पत्रकार प्रमोद दीक्षित के अनुसार, फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन ने दिव्यांग बच्चों के विकास, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने की दिशा में जो कार्य किया है, वह सराहनीय और अनुकरणीय है। इस फाउंडेशन ने नोएडा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में यह संदेश दिया है कि अगर समाज संवेदनशील हो जाए, तो हर बच्चा चमकने की क्षमता रखता है।
यह आयोजन केवल दिवाली का पर्व नहीं था, बल्कि उस सोच का उत्सव था — जो कहती है कि जब मेहनत और मन एक साथ हों, तो हर दीया सिर्फ घर नहीं, बल्कि दिलों को भी रौशन कर देता है।
— संवाददाता प्रमोद दीक्षित, नोएडा